रोजगार के मुद्दे पर तपा सदन 

रोजगार के मुद्दे पर तपा सदन
अनुपूरक सवाल पूछने की इजाजत न मिलने पर विपक्ष का वाकआउट
आउट सोर्स कर्मियों के लिए नीति बनाने पर भी सरकार कर रही है विचार
शिमला, 25 अगस्त।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में मंगलवार को रोजगार के मुद्दे पर सदन में जोरदार हंगामा हुआ। प्रश्नकाल के दौरान सरकार की तरफ से मिले जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्य और अनुपूरक सवाल करना चाहते थे, लेकिन एक सवाल पर बहुत समय लग जाने के बाद अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इसकी इजाजत नहीं दी। जिस पर विपक्ष नाराज हो गया और सदन में नारेबाजी करने लगा। विधानसभा अध्यक्ष ने नारेबाजी के बीच प्रश्नकाल जारी रखा और कुछ देर बाद विपक्षी सदस्य वाकआउट कर सदन से बाहर चला गया।
इससे पहले, प्रश्नकाल के दौरान मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार जहां पद की जरूरत होगी, उसे भरेगी। उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों, बोर्डों और निगमों में आउटसोर्स आधार पर लगे कर्मचारियों का भविष्य कैसे सुरक्षित हो, इसके लिए भी नीति बनाने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि अनेक फंक्शनल पद वर्तमान सरकार के समय से ही नहीं, बल्कि पूर्व सरकार के समय से खाली हैं। मौजूदा सरकार ने केवल खाली पदों को भरने के साथ-साथ युक्तिकरण की प्रक्रिया को अपनाया है। उन्होंने कहा कि अगले साल मार्च और जून माह तक सभी मेडिकल कालेजों में पैरामेडिकल स्टाफ के पदों को भरा जाएगा।
विधायक जीतराम कटवाल और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के मूल सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार पारदर्शी तरीके से कार्य कर रही है और लोकसेवा आयोग और राज्य चयन आयोग में भर्तियों की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है। अब लिखित परीक्षा के अंकों को भी साक्षात्कार के साथ जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि हर व्यक्ति को सरकारी नौकरी देना संभव नहीं है, इसलिए सरकार ने स्वरोजगार की दिशा में अहम कदम उठाए हैं। इसके तहत राजीव गांधी स्टार्टअप योजना शुरू की है। इस योजना के कई चरण हैं और इसके पहले चरण में ई-टैक्सी की खरीद के लिए युवाओं को प्रेरित कर अनुदान दिया गया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि दूसरे चरण में राजीव गांधी सोलर पावर योजना और तीसरे चरण में प्राकृतिक खेती के उत्पादों को खरीदा जा रहा है। उन्होंने कहा कि पदों का युक्तिकरण किया है और स्कूलों में शिक्षकों के खाली पदों को भरा है। स्वास्थ्य विभाग में पूर्व सरकार में 35 फीसदी आक्युपेंसी पर पद चल रहे थे और अभी 65 फीसदी पर चल रहे हैं। डाक्टरों के पद खाली हैं और उन्हें भरा जा रहा है। उन्होंने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन के दौर में कई परिवर्तन किए हैं और सरकार ने कई नए कदम उठाए हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य योजना से कोई पैसा नहीं मिला है और जो पैसा मछुआरों को दिया गया है, वह राजीव गांधी मत्स्य योजना के तहत दिया गया है। उन्होंने कहा कि मछुआरों को जो राहत दी है, वह राज्य सरकार ने अपनी योजना से दिया है और यह मदद सभी मछुआरों को दी जाएगी।
इससे पहले, विधायक जीतराम कटवाल ने कहा कि विभिन्न विभागों में 37 फीसदी वेकेंसी हैं और राज्य बिजली बोर्ड में 57 फीसदी पद खाली हैं।
इसके बाद विपक्षी सदस्य और सवाल उठाना चाह रहे थे, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने इसकी इजाजत नहीं दी। इस पर विपक्षी सदस्य बिफर गए और नारेबाजी करने लगे। विपक्षी सदस्य अपने सवाल उठाने की इजाजत मांग रहे थे।
इस पर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि नियम 130 में भी रोजगार को लेकर चर्चा लगी है और उसमें चर्चा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सदस्य इसमें सभी सवाल उठा सकते हैं। उन्होंने कहा कि एक सवाल पर 25 मिनट से अधिक चर्चा हो चुकी है और बाकी सवाल भी लगाने हैं। कुछ देर सदन में नारेबाजी करने के बाद विपक्षी सदस्य सदन से बाहर चले गए।
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सीटी स्कैन और एमआरआई की अब डेट नहीं
मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सदन में ऐलान किया कि उनकी सरकार सीटी स्कैन और एमआरआई की सुविधा को जीरो वेटिंग पर लाने के लिए कार्य कर रही है और जल्द यह सुविधा प्रदेश के सभी प्रमुख स्वास्थ्य संस्थानों में मिलनी आरंभ हो जाएगी।
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डीपीआर तैयार करने को कंसल्टेंट तैनात
लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि परौर से पधर तक फोर लेन सड़क के निर्माण कार्य के लिए डीपीआर तैयार करने के कार्य के लिए कंसल्टेंट की तैनाती कर दी है। उन्होंने कहा कि सड़क की अलाइनमेंट का कार्य अभी प्रारंभिक स्तर पर है। लोक निर्माण मंत्री ने कहा कि इस फोरलेन में अभी तक 5734 परिवार प्रभावित हुए हैं।
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ऊना जिले में दो सालों में निशानदेही और तक्सीम के 11257 मामलों का निपटारा
राजस्व मंत्री जगत सिंह नेगी ने विधायक राकेश कालिया के सवाल के जवाब में बताया कि ऊना जिले में दो सालों में निशानदेही के कुल 7511 मामले और तक्सीम के 3746 मामलों का निपटारा किया है। निशानदेही के 4467 और तक्सीम के 4066 मामले अभी लंबित हैं। राजस्व मंत्री ने कहा कि सरकार ने हिमाचल प्रदेश लैंड रेवेन्यू एक्ट में संशोधन किया है। इसके तहत संबंधित अधिकारियों को समय पर काम करना होगा और यदि मामला लंबित रहता है तो इसका कारण भी बताना होगा।