डाक्टरों की भर्ती पर तपा सदन सुक्खू-जयराम ठाकुर में नोकझोंक
हिमाचल में छह महीने में कोई भी पीएचसी नहीं रहेगी बिना डॉक्टरों के रू सीएम
चंबा, हमीरपुर, नाहन मेडिकल कालेज में पीजी कक्षाएं शुरू
शिमला, 19 मार्च।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा में वीरवार को डाक्टरों की भर्ती का मामला जोरशोर से गुंजा। इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई। जिससे कुछ देर के लिए सदन का माहौल गरमा गया। इस दौरान मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने घोषणा की प्रदेश में अगले छह महीने में कोई भी पीएचसी बिना डाक्टरों के नहीं रहेगी। इसके लिए सरकार ने 162 डाक्टरों की भर्ती कर ली है। जबकि 236 डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया जारी है।
विधायक राकेश जम्वाल के मूल प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में चिकित्सकों के 2337 और विशेषज्ञ चिकित्सकों के 683 पद स्वीकृत है। इस में से चिकित्सकों के 2159 पद और विशेषज्ञ चिकित्सकों के 447 पद भरे हुए हैं। उन्होंने कहा कि विभाग में विभिन्न श्रेणियों के खाली पड़े पदों को भरने की प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में जरूरत से ज्यादा मेडिकल कालेज खुल गए हैं जबकि यहां तीन से चार मेडिकल कालेज होने चाहिए थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कारण हर साल पास आउट होने वाले सभी 870 एमबीबीएस और 247 पीजी डॉक्टरों को सरकारी क्षेत्र में नौकरी देना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार सीमित संसाधनों में पहले चरण में राज्य के विभिन्न मेडिकल कालेजों में अगले एक साल में कुछ प्रमुख विभागों को मजबूत करने पर काम करेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि विशेषज्ञ डाक्टरों की कमी को दूर करने के लिए सरकार चंबा नाहन और हमीरपुर मेडिकल कालेजों में पीजी की कक्षाएं शुरू करने जा रही है। इसके लिए सरकार मेडिकल कालेजों में असिस्टेंट व एसोसिएट प्रोफेसरों के भर्ती एवं पदोन्नति नियम बदलने जा रही है। इसी मुद्दे पर नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि मुख्यमंत्री ने सदन में जो आकंडे रखे हैं वह तथ्यों पर आधारित नहीं है और हकीकत इसके विपरीत है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए 500 पद स्वीकृत किए थे जिनमें से 300 डॉक्टरों की भर्ती कर दी गई थी लेकिन मौजूदा सरकार ने शेष 200 डाक्टरों की भर्ती करने के लिए अढाई वर्ष का समय लगा दिया। उन्होंने कहा कि सरकार के पास बेरोजगार डाक्टरों का आंकड़ा न होना आश्चर्यजनक है। इसी सवाल पर स्वास्थ्य मंत्री कर्नल धनीराम शांडिल ने कहा कि प्रदेश में हर साल जितने डॉक्टर अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं उन सभी को सरकार फिलहाल नौकरी नहीं दे पा रही है।
विधायक बिक्रम ठाकुर के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने कहा कि निजी भूमि पर बांस कटान करने पर कोई फीस नहीं लगेगी क्योंकि बांस को पेड़ की श्रेणी से बाहर कर दिया है।
विधायक केवल सिंह पठानिया के एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने डॉक्टरों की भर्ती के लिए वाक इन इंटरव्यू इसलिए बंद किए ताकि काबिल डाक्टर भर्ती किए जा सके।
आउटसोर्स कर्मचारियों के नियमितिकरण से जुड़े प्रश्न का उत्तर न मिलने पर सत्ता पक्ष व विपक्ष में नोकझोंक हुई। भाजपा विधायक दीपराम ने कहा कि उन्होंने एक साल पहले यह प्रश्न पूछा था लेकिन अभी तक इसका उत्तर नहीं मिला है। नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि कांग्रेस ने चुनाव में वादा किया था कि पहली कैबिनेट में एक लाख नौकरियां दी जाएगी। लेकिन सच्चाई ये है कि पंद्रह हजार के करीब आउटसोर्स कर्मियों को नौकरी से निकाला गया है। उन्होंने कहा कि आउटसोर्स की जो एजेंसी है वह कांग्रेस नेताओं के नाम पर पंजीकृत है। साक्षात्कार से पहले पैसे लिए जा रहे हैं। चयन होगा या नहीं यह पता नहीं है लेकिन पैसे लिए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री सुखविन्दर सिंह सुक्खू ने कहा कि विभिन्न विभागों में कार्यरत मल्टी टास्क वर्करों के लिए सरकार नीति बनाएगी। इसको लेकर कानूनी राय लेने के बाद सरकार इस मामले पर आगे बढ़ेगी। विधायक सतपाल सिंह सत्ती के प्रश्न के मूल उत्तर में हस्तक्षेप करते हुए मुख्यमंत्री ने सदन में यह जानकारी दी।
लाहुल स्पीति से विधायक कुमारी अनुराधा राणा के प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2025 में प्रदेश में 12 किसानों ने अलग अलग कंपनियों व्यापारियों और आढ़तियों के खिलाफ धोखाधड़ी के मामले दर्ज करवाई है। इनमें 10 मामलों में से एक मामला न्यायालय में विचाराधीन है। 2 मामलों में निरस्त रिपोर्ट तैयार की गई है। 7 मामले अन्वेष्णाधीन है। मुख्यमंत्री ने बताया कि ऐसे मामलों में पुलिस द्वारा नियमानुसार कार्रवाई की जाती है।
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एनसीटीई की मंजूरी के बाद शुरू होगी बीएड की कक्षाएं
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर ने कहा कि राजा वीरभद्र सिंह स्नातकोत्तर महाविद्यालय सीमा रोहड़ू में बीएड की कक्षाएं आरंभ करने का मामला सरकार के पास विचाराधीन है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रदेश के कई कालेजों में बीएड डिग्री कोर्स शुरू करने जा रही है। एनसीटीई से स्वीकृति मिलना बाकी है। एनसीटीई से मंजूरी मिलने के बाद ही बीएड कोर्स शुरू होंगे। विधायक मोहन लाल ब्राक्टा के प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।









