सुक्खू सरकार के एक और फैसले को कानूनी चुनौती
पावर प्रोजेक्ट से भू राजस्व बसूली के खिलाफ अदालत पहुंची पावर कंपनियां
शिमला, 14 मार्च।
हिमाचल प्रदेश की सुक्खू सरकार का वाटर सेस के बाद अब पावर प्रोजेक्टों से भू राजस्व वसूली का फैसला भी कानून की कसौटी पर परखा जाएगा। पावर कंपनियों ने पावर प्रोजेक्टों से 2 फीसद भू राजस्व वसूलने के सुक्खू सरकार के फैसले को हिमाचल हाई कोर्ट में चुनौती दी है। पावर कंपनियों का कहना है कि सरकार पावर प्रोजेक्टों को दी गई भूमि पर राजस्व वसूल सकती है, मगर समूचे पावर प्रोजेक्ट की कीमत का 2 फीसद राजस्व के तौर पर वसूलने का अधिकार सरकार को नहीं है।
प्रदेश सरकार ने बीते साल अक्तूबर व दिसंबर में 191 पावर प्रोजेक्टों से राजस्व वसूलने बारे अलग अलग अधिसूचनाएं जारी की थी। सुक्खू सरकार को इस फैसले के लागू होने से सरकारी खजाने में 1500 करोड़ से अधिक की सालाना आमदन की उम्मीद है। मगर फैसले को हाई कोर्ट में चुनौती दी गई है। हाई कोर्ट ने सरकार से इस मामले में जवाब तलब किया है।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले सरकार ने साल 2023 में हिमाचल वाटर सेस कानून बनाया था। कानून के तहत पावर कंपनियों से सेस वसूलने बारे नोटिस भी जारी हुए। कुछेक कंपनियों ने सेस की रकम राज्य सरकार द्वारा गठित जल आयोग के पास जमा भी की। बेशक जल आयोग अभी भी अस्तित्व में है, मगर हाई कोर्ट सरकार के वाटर सेस कानून को निरस्त कर चुका है। सरकार ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। सुप्रीम कोर्ट में मामले की प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई का आग्रह भी सरकार ने किया है, मगर फिलहाल मामला लंबित है।
बहरहाल राजस्व जुटाने के मकसद से लिए गए सुक्खू सरकार के दो फैसले फिलहाल कानून की कसौटी पर परखे जा रहे हैं। इन फैसलों को लागू करने की अनुमति मिलने से प्रदेश को आर्थिक मोर्चे पर संजीवनी मिलने की उम्मीद रहेगी। अन्यथा आरडीजी बंद होने के बाद आगामी माली साल में सरकार के समक्ष चुनौतियों का पहाड़ खड़ा होना तय है जिसका सीधा असर राज्य के विकास पर पड़ेगा।







