विपक्ष के दबाब के बाद सुक्खू सरकार ने आधा दर्जन से अधिक कांग्रेस नेताओं से वापस लिया कैबिनेट रैंक

विपक्ष के दबाब के बाद सुक्खू सरकार ने आधा दर्जन से अधिक कांग्रेस नेताओं से वापस लिया कैबिनेट रैंक
30 सितंबर तक 20 फीसद वेतन भी स्थगित
आरडीजी बंद होने के बाद प्रदेश को आत्म निर्भर बनाने के मद्देनजर फैसला: सुक्खू
शिमला, 17 मार्च।
हिमाचल सरकार ने आधा दर्जन से अधिक कांग्रेस नेताओं का कैबिनेट रैंक वापस ले लिया है। कैबिनेट रैंक छीनने के अलावा इन नेताओं का 20 फीसद वेतन आगामी 30 सितंबर तक स्थगित कर दिया गया है। यानी 30 सितंबर तक इन नेताओं को वर्तमान में मिल रहे वेतन से 20 फीसद कम वेतन मिलेगा। कैबिनेट रैंक वापस लेने के फैसले को लेकर मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने कहा कि केंद्र सरकार ने राजस्व घाटा अनुदान बंद कर दिया है। प्रदेश को आत्म निर्भर बनाने के मकसद से सरकार कार्य कर रही है। लिहाजा कैबिनेट रैंक वापस लिया गया है। उन्होंने कहा कि भविष्य मेें इस तरह के और फैसले लिए जाएंगे। गौरतलब है कि प्रदेश आर्थिक संकट से जूझ रहा है। आर्थिक तंगी के बीच प्रदेश में कैबिनेट रैंक के औहदेदारों को लेकर भाजपा लगातार सरकार पर निशाना साध रही है। कैबिनेट रैंक के अलावा सीपीएस भी भाजपा के निशाने पर रहे।
नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने मंगलवार को पत्रकारों के साथ बातचीत में कहा कि सलाहकार अपनी फील्ड का विशेषज्ञ हो, तो कोई दिक्कत नहीं, मगर ठेकेदारों को सलाहकार बनाना जायज नहीं। उन्होंने कहा कि बीते दिनों दिल्ली में कांग्रेस हाईकमान ने इन नियुक्तियों को लेकर मुख्यमंत्री से नाखुशी जताई है। संभवत: यही वजह है कि वह इन्हें हटाने को विवश हुए हैं।
इस बीच सामान्य प्रशासन विभाग का कहना है कि यह निर्णय प्रशासनिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से लिया गया है। इस फैसले को प्रशासनिक सुधार और खर्चों पर नियंत्रण के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय में सरकार की कार्यप्रणाली पर व्यापक असर पड़ सकता है। विभाग के संयुक्त सचिव कुलविंदर सिंह द्वारा हस्तक्षारित नोटिफिकेशन में लिखा गया है कि मुझे यह सूचित करने का निर्देश दिया गया है कि प्रशासनिक प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के उद्देश्य से कैबिनेट रैंक की स्थिति की समीक्षा की गई है और सरकार द्वारा यह निर्णय लिया गया है कि विभिन्न बोर्ड, निगम और आयोगों के अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, प्रधान सलाहकार राजनीतिक सलाहकार आदि को वर्तमान में प्रदान की गई कैबिनेट रैंक की सुविधा को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाता है।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश में पर्यटन विकास निगम के उपाध्यक्ष आरएस बाली, राज्य योजना बोर्ड के उपाध्यक्ष भवानी सिंह पठानिया, मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार सुनील शर्मा बिट्टू, प्रधान मीडिया सलाहकार नरेश चौहान, इन्फ्रास्ट्रक्चर सलाहकार अनिल कपिल, आईटी सलाहकार गोकुल बुटेल और सातवें राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष नंदलाल को भी कैबिनेट रैंक मिला है। इनके अलावा कुछ अन्य नेताओं को कैबिनेट रैंक प्रदान किया गया है। कैबिनेट रैंक में तैनात सुनील शर्मा बिट्टू का वेतन अढ़ाई लाख रुपए मासिक है। उन्हें इस वेतन के साथ-साथ मेडिकल रिंबर्समेंट, यात्रा भत्ता, दैनिक भत्ता और वाहन जैसी अन्य सुविधाएं भी मिलती हैं। मीडिया सलाहकार नरेश चौहान का वेतन भी अढ़ाई लाख रुपये प्रति माह है। इन्फ्रास्ट्रक्चर सलाहकार अनिल कपिल का वेतन 2.31 लाख रुपए मासिक है। आईटी सलाहकार गोकुल बुटेल मात्र एक रुपए मासिक वेतन लेते हैं।
उधर सरकार का कहना है कि यह निर्णय प्रशासनिक प्रोटोकॉल को सुव्यवस्थित करने के प्रयासों के तहत लिया गया है। निर्णय के साथ ही इन पदों को दिए गए कैबिनेट रैंक से संबंधित सभी प्रावधान तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिए गए हैं। इस संबंध में सभी प्रशासनिक सचिवों को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं, ताकि इस निर्णय को शीघ्रता से लागू किया जा सके और उनके अधीन सभी विभागों में इसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।