हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण 18 मार्च से

हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से
मुख्यमंत्री सुक्खू 21 मार्च को पेश करेंगे प्रदेश का वर्ष 2026-27 का बजट
शिमला, 17 मार्च।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र का दूसरा चरण बुधवार से शुरू होगा। बजट सत्र के दूसरे चरण में 13 बैठकें होंगी। बजट सत्र की शुरूआत 16 फरवरी से हुई थी। 16 फरवरी को राज्यपाल का अभिभाषण सदन में हुआ। इसके बाद 18 फरवरी तक राजस्व घाटा अनुदान, आरडीजी पर चर्चा के बाद पहला चरण समाप्त हो गया था।
विधान सभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने मंगलवार को शिमला में एक पत्रकार वार्ता में कहा कि सत्र के दूसरे चरण में दो दिनों तक राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा होगी। 20 मार्च को मुख्यमंत्री चर्चा का जवाब देंगे। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू 21 मार्च को प्रदेश का साल 2026-27 का बजट विधानसभा में पेश करेंगे। 23 से 25 मार्च तक बजट पर चर्चा होगी। 27 व 28 मार्च को कटौती प्रस्तावों पर सदन में चर्चा होगी। उन्होंने बताया कि 30 मार्च को सदन में बजट पारित किया जाएगा। 31 मार्च को प्राइवेट मेंबर डे होगा।
पठानिया ने बताया कि बजट सत्र को लेकर सदस्यों की तरफ से 834 सवालों के नोटिस मिले हैं। इनमें से 665 तारांकित व 169 अतारांकित सवाल हैं। नियम 62 के तहत 8 व 101 के तहत 3 प्रस्ताव चर्चा के लिए विधानसभा सचिवालय को मिले हैं। इसके अलावा नियम 130 के तहत भी 5 विषय चर्चा के लिए प्राप्त हुए हैं।
विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि सदस्य सदन में अपने चुनाव क्षेत्र से जुड़े मुद्दों को उठा सकते हैं। साथ ही ईरान -इजरायल युद्ध का क्या प्रभाव पड़ा है, इस पर भी बात होने की उम्मीद है।मगर इसमें हिमाचल का जिक्र रहना चाहिए। पठानिया ने कहा कि उनका प्रयास सदस्यों को अपनी बात रखने के लिए अधिक से अधिक वक्त देने का रहता है।
एक सवाल के जवाब में कुलदीप सिंह पठानिया ने कहा कि याचिका समिति ने करीब 100 मुद्दों का निपटारा किया है। 5 दर्जन के करीब मुद्दे लंबित हैं। उन्होंने कहा कि समिति का प्रयास रहता है  कि नियमों के दायरे में रह कर लंबित मसलों को निपटाया जाए। ऐसा न होने की स्थिति में समिति अपने विशेषाधिकार का इसेत्माल भी कर सकती है। उन्होंने का कि सांसद हर्ष महाजन ने अपने वक्तव्य को लेकर विशेषाधिकार समिति को जवाब दे दिया है। इसके अलावा विशेषाधिकार समिति के पास कई मुद्दे लंबित हैं।विधानसभा उपाध्यक्ष विशेषाधिकार हनन के मुद्दों को देखते रहे हैं। मगर अब उपाध्यक्ष न होने की वजह से फिलहाल वह स्वयं इन मसलों को देख रहे हैं।