सुक्खू हाई कोर्ट की रोक से नाराज
मुख्यमंत्री ने विश्वविद्यालयों में फीस वृद्धि को बताया मामूली
किशाऊ बांध में प्रदेश हितों से नहीं होगा समझौता
शिमला, 19 जून।
हिमाचल प्रदेश सरकार और प्रदेश हाई कोर्ट के बीच तकरार की स्थिति पैदा हो गई है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू प्रदेश हाई कोर्ट द्वारा आउटसोर्स भर्तियों पर लगाई गई रोक से नाराज हैं। आउटसोर्स भर्ती नीति पर हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट द्वारा लगाई गई रोक के संबंध में आज शिमला में मीडिया के सवालों पूछे गए सवालों पर मुख्यमंत्री ने कहा कि नीतिगत फैसले लेना सरकार का अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यवस्था में कोई कमी है तो उसे सुधारा जा सकता है, लेकिन केवल रोक लगाने से आम जनता का भला नहीं होगा। उन्होंने कहा कि सरकार जनहित को ध्यान में रखकर फैसले ले रही है।
विश्वविद्यालयों में फीस वृद्धि के मुद्दे पर मुख्यमंत्री ने कहा कि लंबे समय बाद फीस में मामूली बढ़ोतरी की गई है। इसके बावजूद सरकार छात्र हितों को प्राथमिकता देती है और आवश्यकता पड़ने पर इस विषय पर पुनर्विचार किया जा सकता है।
किशाऊ बांध परियोजना पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हिमाचल के हितों से कोई समझौता नहीं किया है। उन्होंने कहा कि पानी हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड का है, इसलिए परियोजना का वित्तीय बोझ भी इन राज्यों पर नहीं डाला जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार के दृढ़ रुख के कारण हिमाचल प्रदेश को बिना किसी निवेश के 211 मेगावाट मुफ्त बिजली मिलेगी, जिससे भविष्य में प्रदेश को बड़ा आर्थिक लाभ होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार प्रदेश की प्राकृतिक संपदा, जल संसाधनों और सरकारी भूमि के हितों की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई भी समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा जिससे हिमाचल प्रदेश के हित प्रभावित होते हों। उन्होंने पूर्व भाजपा सरकार के कार्यकाल में हुए कुछ समझौतों पर भी सवाल उठाए और कहा कि प्रदेश के हित सर्वोपरि हैं।
सुक्खू ने कहा कि जल विद्युत परियोजनाओं में मिलने वाली रॉयल्टी बढ़ाने और निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद परियोजनाओं को हिमाचल प्रदेश को वापस सौंपने की मांग केंद्र सरकार के समक्ष उठाई गई है।





