विधानसभा सत्र सरकार के लिए होगा अत्यंत चुनौतीपूर्ण
प्रदेश की वित्तीय स्थिति, कानून व्यवस्था और प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग पर सरकार की घेराबंदी करेगी भाजपा
सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ़ प्रदेश में अविश्वास का एक माहौल: जयराम ठाकुर
शिमला, 17 मार्च।
हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे चरण के आगाज से पहले भाजपा ने मुद्दों को लेकर राजनीति गरमा दी है। मंगलवार को नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर ने एक के बाद एक कई मुद्दों को लेकर सरकार पर हमला बोला। कानून व्यवस्था के साथ साथ प्रदेश के वित्तीय व प्राकृतिक संसाधनों के दुरुपयोग को लेकर सरकार पर हमला बोलते हुए जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार के खिलाफ अविश्वास का माहौल है और प्रदेश के लोग इस सरकार को उखाड़ पेंकने को तैयार बैठे हैं।
विधानसभा स्थित अपने कार्यालय कक्ष में पत्रकारों के साथ अनौपचारिक बातचीत में जयराम ठाकुर ने कहा कि बुधवार से शुरू हो रहा विधानसभा सत्र सरकार के लिए अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहने वाला है। उन्होंने कहा कि विपक्ष ने प्रदेश में ठप्प पड़े विकास कार्यों, कानून व्यवस्था की दयनीय स्थिति और अन्य जनहित के मुद्दों पर नियमबद्ध नोटिस दिए हैं, जिनका जवाब देना सरकार के लिए टेढ़ी खीर साबित होगा।
जयराम ठाकुर ने कहा कि पूरे प्रदेश में इस समय कांग्रेस सरकार और मुख्यमंत्री के खिलाफ़ अविश्वास का एक माहौल खड़ा हुआ है, जो ये दर्शाता है कि जनता इस सरकार से खुश नहीं है। नेता प्रतिपक्ष ने मुख्यमंत्री पर सदन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए कहा कि यह सरकार की कार्यशैली का हिस्सा बन चुका है और मुख्यमंत्री के भ्रामक बयानों को विशेषाधिकार हनन का मामला मानते हुए इसकी गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने परंपराओं के उल्लंघन का मुद्दा उठाते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश के संसदीय इतिहास में संभवत: यह पहली बार हुआ है जब राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा को जानबूझकर लंबित रखा गया है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि सरकार इस समय भारी असमंजस और वैचारिक भटकाव की स्थिति से गुजर रही है। राज्य की चरमराती आर्थिक स्थिति को सबसे बड़ा मुद्दा बताते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने वित्तीय संकट और विकास कार्यों पर लगे विराम को लेकर सरकार से जवाब मांगा है, लेकिन सत्ता पक्ष के पास इन बुनियादी सवालों का कोई ठोस उत्तर नहीं है।
जयराम ठाकुर ने प्रदेश में सक्रिय भू-माफिया और बिचौलियों पर प्रहार करते हुए कहा कि धारा 118 के नाम पर लोगों को गुमराह कर अवैध उगाही करने वाला एक बड़ा गिरोह सक्रिय है। नतीजतन उद्योगों का निरंतर पलायन हो रहा है और साढ़े तीन साल बीत जाने के बाद भी जनहित के संस्थानों को बंद करने का सिलसिला थमा नहीं है। भ्रष्टाचार के मुद्दे पर सरकार को आड़े हाथों लेते हुए उन्होंने एंटी करप्शन ब्यूरो और विजिलेंस विभाग को सूचना का अधिकार के दायरे से बाहर करने के निर्णय पर कड़ी आपत्ति जताई और सवाल किया कि आखिर सरकार ऐसी कौन सी गोपनीय बातें हैं जिन्हें जनता से छिपाना चाहती है। उन्होंने कहा कि तमाम सरकारी खजाने से मित्रों पर भारी भरकम रकम खर्च करने के बाद सुर्खियां बटोरने के लिए सरकार कैबिनेट रैंक वापस लेने जैसे कॉस्मेटिक सर्जरी कर रही है। उन्होंने कहा कि सरकार को सदन के भीतर एक-एक पैसे का हिसाब और अपने कुशासन का जवाब देना ही होगा।











