कमर्शियल रसोई गैस के लिए हाहाकार

कमर्शियल रसोई गैस के लिए हाहाकार
हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के होटल भी मुश्किल में
खाना पकाने के लिए फिर से लकड़ी के ‘चूल्हों’ का इस्तेमाल शुरू
शिमला, 19 मार्च।
कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडरों की कमी ने न केवल निजी हॉस्पिटैलिटी इंडस्ट्री को प्रभावित किया है, बल्कि हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के होटलों को भी मुश्किल में डाल दिया है।
शिमला में स्थित होटल हॉलिडे होम, जो हिमाचल पर्यटन विकास निगम का एक प्रमुख प्रतिष्ठान है और राज्य विधानसभा सत्रों के दौरान कैटरिंग सेवाएँ भी प्रदान करता है, ने खाना पकाने के लिए फिर से लकड़ी के चूल्हों’ का इस्तेमाल शुरू कर दिया है।
बजट सत्र चल रहा है, ऐसे में होटल हॉलिडे होम रोज़ाना 500 से ज़्यादा लोगों को भोजन उपलब्ध कराता है, जिनमें विधायक और स्टाफ शामिल हैं। ऐसे में फिलहाल होटल अपने कामकाज को जारी रखने के लिए डिपो से मिलने वाली लकड़ी पर निर्भर है।
रसोई स्टाफ़ के सदस्य बेली राम के अनुसार होटल की रसोई रोज़ाना लगभग 750 लोगों को भोजन कराती है, जिनमें विधानसभा सदस्य और स्टाफ, होटल के मेहमान और स्थानीय ग्राहक शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है कि कारोबार पर कोई असर न पड़े, और जब तक कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडरों की कमी बनी रहेगी, तब तक रसोई में खाना पकाने वाली गैस की जगह लकड़ी का इस्तेमाल किया जाएगा।
होटल हॉलिडे होम के एक रसोइए अरविंद ने कहा कि हम सभी जानते हैं कि पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडरों की कमी हो गई है। हम रोज़ाना लगभग 700 लोगों को भोजन कराने के लिए लकड़ी पर खाना बना रहे हैं।
गौरतलब है कि कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडरों की कमी के कारण पूरे राज्य में बड़ी संख्या में होटल और रेस्तरां बंद हो गए हैं।
अरविंद ने कहा कि उनका लक्ष्य इस मुश्किल का डटकर सामना करना और रसोई का काम जारी रखना है। जब तक कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडर उपलब्ध नहीं हो जाते, तब तक खाना लकड़ी के चूल्हों पर ही पकाया जाएगा।
इस बीच, निजी रेस्तरां और ढाबा मालिकों को भी भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। राज्य की राजधानी शिमला में कमर्शियल रसोई गैस सिलेंडरों की कमी के चलते ऐसे कई प्रतिष्ठान बंद हो गए हैं।
शिमला में एक ढाबा मालिक प्रेम चंद ने कहा कि उन्होंने अपने स्टाफ़ को घर वापस भेज दिया है, क्योंकि रसोई गैस की कमी है और हम बहुत सीमित मात्रा में ही खाना बना पा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हालात सचमुच बहुत खराब हैं।