हिमाचल में मार्च में ही तपने लगे पहाड़
अधिकतम और न्यूनतम तापमान सामान्य से 5 से 13 डिग्री तक अधिक
शिमला, 05 मार्च।
हिमाचल प्रदेश में सर्दियों में ही पहाड़ तपने लगे हैं। इस बात का अंदाजा यहीं से लगाया जा सकता है कि प्रदेश में जहां न्यूनतम तापमान सामान्य से दो से आठ डिग्री सेल्सियस तक अधिक दर्ज किया जा रहा है, वहीं राज्य में अधिकतम तापमान सामान्य से 5 से 13 डिग्री अधिक सेल्सियस तक पहुंच गया है। ऐसे में प्रदेश में खासकर मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में मार्च महीने के आरंभ में ही लोगों को चिलचिलाती गर्मी का एहसास होने लगा है और प्रदेश में अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया है।
मौसम विभाग द्वारा जारी पूर्वानुमानों के अनुसार प्रदेश में अधिकतम और न्यूनतम तापमान में यह बढ़ोतरी आने वाले दिनों में भी जारी रहेगी और लोगों को मार्च महीने में ही तपती गर्मी से दो-चार होना पड़ेगा क्योंकि आने वाले दिनों में मौसम में कोई खास परिवर्तन नहीं होने वाला है। विभाग के अनुसार हिमालय क्षेत्र में ताजा पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय हो रहा है जो काफी कमजोर है। इसके प्रभाव से राज्य में 7, 9 और 10 मार्च को अधिक ऊंचाई वाले कुछ स्थानों पर वर्षा और बर्फबारी की संभावना है। विभाग के अनुसार 11 मार्च को राज्य के मैदानी, मध्यम और अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में अलग-अलग स्थानों पर वर्षा और बर्फबारी हो सकती है जबकि शेष दिनों में प्रदेश में मौसम साफ बना रहेगा और न्यूनतम तथा अधिकतम तापमान में औसतन दो से तीन डिग्री सेल्सियस तक की वृद्धि होने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में यह वृद्धि दो से आठ डिग्री तक हो सकती है। इससे लोगों को मार्च में ही चिलचिलाती गर्मी का सामना करना पड़ेगा। साथ ही लोगों को इस बार समय से पहले पेयजल किल्लत से भी जूझना पड़ सकता है। राजधानी शिमला के अधिकांश इलाकों में फरवरी महीने से ही पानी की राशनिंग आरंभ हो चुकी है और लोगों को सिर्फ वैकल्पिक दिनों में ही पानी की आपूर्ति की जा रही है। हालांकि राज्य के अन्य हिस्सों में फिलहाल पेयजल की स्थिति सामान्य है लेकिन मौसम के लगातार साफ बने रहने की स्थिति में जल्द ही पेयजल किल्लत सामने आ सकती है क्योंकि इस बार प्रदेश में सर्दियां नाम मात्र की हुई है। इस कारण प्रदेश में कृषि और बागवानी भी बुरी तरह प्रभावित हुई है और खासकर गेहूं की फसल नाम मात्र की ही रह गई है। प्रदेश में पिछले कई सप्ताह से मौसम के लगातार साफ बने रहने के कारण सूखे जैसे हालात चल रहे हैं। इस कारण राज्य में मार्च महीने में ही जंगलों में आग लगने की घटनाएं बढ़ गई हैं और जगह-जगह जंगलों में आग लगी हुई है।








