हिमालय की धरोहर को मिली नई पहचान
लुप्त होती गद्दी कुत्ते की नस्ल के संरक्षण को बड़ी कामयाबी
‘स्कूबी’ और ‘पुट्टी’ का इंडियन नेशनल केनेल क्लब में पंजीकरण
सीएसके कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों की पहल रंग लाई
संरक्षण अभियान को मिला राष्ट्रीय आधार
शिमला, 09 जुलाई।
पश्चिमी हिमालय की सांस्कृतिक पहचान और पारंपरिक पशुधन विरासत का अभिन्न हिस्सा मानी जाने वाली ‘हिमालयन गद्दी डॉग’ नस्ल को विलुप्त होने से बचाने की मुहिम में बड़ी सफलता मिली है। इस दुर्लभ देसी नस्ल के दो शुद्ध हिमालयन गद्दी कुत्तों ‘स्कूबी’ और ‘पुट्टी’ का इंडियन नेशनल केनेल क्लब में आधिकारिक पंजीकरण कर लिया गया है। विशेषज्ञ इसे देश की लुप्तप्राय स्वदेशी कुत्तों की नस्लों के संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक उपलब्धि मान रहे हैं।
यह उपलब्धि डॉ. जी.सी. नेगी कॉलेज ऑफ वेटरिनरी एंड एनिमल साइंसेज (डीजीसीएन-कोवास), सीएसके हिमाचल प्रदेश कृषि विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों और शोधकर्ताओं के वर्षों के समर्पित प्रयासों का परिणाम है। संस्थान लंबे समय से हिमालयन गद्दी डॉग की पहचान, वैज्ञानिक दस्तावेजीकरण और नस्ल संरक्षण पर कार्य कर रहा है।
इस अभियान को सफल बनाने में प्रो. शिवानी कटोच की भूमिका विशेष रूप से सराहनीय रही। उनके नेतृत्व में नस्ल के वैज्ञानिक संरक्षण और पंजीकरण की प्रक्रिया को गति मिली। वहीं, हिमाचल प्रदेश सरकार में पशुपालन विभाग के तत्कालीन सचिव रितेश चौहान ने भी परियोजना को संस्थागत सहयोग और आवश्यक प्रशासनिक समर्थन उपलब्ध कराया, जिससे संरक्षण कार्य लगातार आगे बढ़ता रहा।
विशेषज्ञों के अनुसार हिमालयन गद्दी डॉग केवल एक कुत्ते की नस्ल नहीं, बल्कि गद्दी समुदाय की सदियों पुरानी जीवनशैली, पशुपालन परंपरा और पश्चिमी हिमालय की सांस्कृतिक विरासत का जीवंत प्रतीक है। यह नस्ल कठिन पर्वतीय परिस्थितियों में भेड़-बकरियों के झुंडों की सुरक्षा, असाधारण सहनशक्ति, वफादारी और सतर्कता के लिए जानी जाती रही है। हालांकि विदेशी नस्लों के बढ़ते प्रचलन और बदलती सामाजिक परिस्थितियों के कारण इसकी संख्या लगातार घट रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूबी और पुट्टी के आधिकारिक पंजीकरण से इस नस्ल के वैज्ञानिक प्रजनन, शुद्ध वंशावली के संरक्षण और राष्ट्रीय स्तर पर पहचान को नई मजबूती मिलेगी। इससे भविष्य में संरक्षण कार्यक्रमों को भी गति मिलने की उम्मीद है।
इस उपलब्धि को हिमालय की जैव विविधता, स्वदेशी पशुधन विरासत और भारतीय देसी नस्लों के संरक्षण की दिशा में एक मील का पत्थर माना जा रहा है। उम्मीद जताई जा रही है कि यह पहल देशभर में स्वदेशी कुत्तों की अन्य दुर्लभ नस्लों के संरक्षण के लिए भी प्रेरणा बनेगी।
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आखिर क्यों खास है हिमालयन गद्दी डॉग?
हिमालयन गद्दी डॉग पश्चिमी हिमालय की दुर्लभ और स्वदेशी कुत्ते की नस्ल है। ये कुत्ता सदियों से गद्दी समुदाय के साथ भेड़-बकरियों के झुंडों की सुरक्षा में तैनात रहता है। हिमालयन गद्दी डॉग बर्फीले और दुर्गम पहाड़ी क्षेत्रों में काम करने की अद्भुत क्षमता रखता है। लेकिन विदेशी नस्लों के बढ़ते प्रचलन से हिमालयन गद्दी डॉग की संख्या लगातार घट रही है। विशेषज्ञ इसे हिमाचल की सांस्कृतिक और जैविक धरोहर मानते हैं।











