भारतीय संस्कृति और विरासत को संरक्षित रखने में कलाकारों की भूमिका अहम: राज्यपाल
शिमला, 19 जून।
हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा है कि भारत की सभ्यता और संस्कृति को जीवित रखने में कलाकारों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। कलाकार ही हमारी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं।
राज्यपाल भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान शिमला में आयोजित पांच दिवसीय कला शिविर के दौरान तैयार की गई कलाकृतियों की प्रदर्शनी एवं नवस्थापित आर्ट गैलरी के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में पहुंचे जहां राज्यपाल ने ये बात कही। यह कला शिविर कांगड़ा लघु चित्रकला में लोक एवं ग्रामीण जीवन की छवियां- स्वदेशी भारतीय कला परिप्रेक्ष्य” विषय पर आयोजित किया गया था।
राज्यपाल ने कहा कि कलाकार तभी इस प्रकार की कला परंपराओं को आगे बढ़ा पाएंगे जब उनकी आजीविका भी सुरक्षित होगी। उन्होंने सरकार, सामाजिक संस्थाओं और समाज के अन्य वर्गों से कलाकारों को अधिक से अधिक सहयोग देने का आह्वान किया ताकि पारंपरिक कलाओं को निरंतर प्रोत्साहन मिलता रहे। उन्होंने कहा कि कांगड़ा चित्रकला और इससे जुड़ी परंपराएं गुरु-शिष्य परंपरा के माध्यम से आज भी जीवित हैं। उन्होंने कहा कि आज भी लोक जीवन, ग्रामीण परंपराओं और पारंपरिक हस्तकलाओं को संरक्षित करने की दिशा में उल्लेखनीय कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि कांगड़ा क्षेत्र की लोक परंपराओं, ग्रामीण जीवन और पारंपरिक कढ़ाई कला को एक ही मंच पर देखने का अवसर मिलना सुखद है। इस दिशा में भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए बेहतर कार्य कर रहा है।
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भारत की मजबूत विदेश नीति और दूरदर्शी नेतृत्व से संकटों का असर सीमित रहा
राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि पश्चिम एशिया में पैदा हुए संकट के बावजूद भारत ने अपनी मजबूत कूटनीति और संतुलित विदेश नीति के दम पर स्थिति को प्रभावी ढंग से संभाला है। उन्होंने कहा कि भारत आज वैश्विक स्तर पर एक बड़ा बाजार और महत्वपूर्ण शक्ति के रूप में स्थापित हो चुका है, जिसे दुनिया अच्छी तरह समझती है। मीडिया से बातचीत के दौरान राज्यपाल ने कहा कि देश के नेतृत्व की दूरदर्शी सोच और बेहतर नीतियों के कारण भारतीय अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा प्रतिकूल असर नहीं पड़ा। भारत ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बीच भी अपने आर्थिक हितों और रणनीतिक संबंधों को संतुलित बनाए रखा। उन्होंने विश्वास जताया कि जिन क्षेत्रों में अस्थायी कठिनाइयां पैदा हुई थीं, वे जल्द ही सामान्य हो जाएंगी और आपूर्ति व्यवस्था सहित अन्य गतिविधियां पूरी तरह बहाल हो जाएंगी।
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सिविक सेंस और संस्कारों पर देना होगा जोर
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला के पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों और जंगलों में फैली गंदगी को लेकर एक विदेशी महिला पर्यटक का वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है। वीडियो में महिला ने स्थानीय लोगों और पर्यटकों से भावुक अपील करते हुए प्राकृतिक और धार्मिक स्थलों को स्वच्छ रखने की बात कही है। महिला ने अपने संदेश में कहा कि हिमाचल प्रदेश को ‘देवभूमि’ कहा जाता है, लेकिन यहां विभिन्न पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों और जंगलों में फैला कचरा देखकर उसे बेहद दुख हुआ। उसने लोगों से अपील की कि वे सार्वजनिक स्थानों पर कचरा फेंकना बंद करें और प्रदेश की सुंदरता को बनाए रखने में सहयोग दें। इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि समाज में सिविक सेंस को और मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि लोगों को सार्वजनिक संपत्ति और प्राकृतिक धरोहरों के प्रति अधिक जिम्मेदारी दिखानी चाहिए। राज्यपाल ने कहा कि इस दिशा में सामाजिक संस्थाओं और गैर सरकारी संगठनों को भी आगे आना होगा। उन्होंने कहा कि स्वच्छता और सार्वजनिक संपत्ति के संरक्षण के संस्कार घर से ही शुरू होने चाहिए। यदि परिवारों में बचपन से ही ऐसे संस्कार विकसित किए जाएं तो लोग राष्ट्रीय संपत्ति को भी अपनी संपत्ति की तरह समझेंगे और उसकी रक्षा करेंगे।










